January 28, 2026

भागवत कथाः शापित गरूड का यमुना में प्रवेश वर्जित, गरूड के भय से दह में छुपे कालिया को श्रीकृष्ण का अभयदान


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कालिया नाग पन्नग जाति का नाग था. नागों की माता कद्रू और कश्यप का पुत्र था. कालिया पहले रमण द्वीप में निवास करता था. किंतु पक्षीराज गरुड़ से उसकी शत्रुता हो गई तो जान बचाने के लिए वह यमुना नदी में कुण्ड में आकर रहने लगा था.

दरअसल जब गरूड़ नागों का संहार करने लगे तो गरूड और नागों के बीच एक समझौता हुआ कि गरूड़ को प्रत्येक माह में अमावस्या के दिन एक नियत वृक्ष के नीचे एक सर्प गरूड के आहार के लिए दिया जाएगा.

सभी सर्प जाति इस नियम का पालन कर रही थी. कालिय नाग को अपने विष और बल का बड़ा घमंड था. उसने नागों की स्थापित परंपरा को ठुकरा दिया. उसने गरूड के लिए बलि देना तो दूर गरूड की बलि को स्वयं ही खा लिया.

सर्प और नाग जाति इससे बड़ी क्रुद्ध हुई कि अपने वंश का होकर भी वह ऐसे कार्य कर रहा है. उन्हें गरूड़ के क्रोध का भय भी था. नागों ने गरूड़ को सारी बात बता दी.

गरूड ने कालिया पर आक्रमण किया. कालिया ने अपने सौ फल फैलाए और गरूड पर विषप्रहार किया. गरूड तो अमृत कलश के वाहक रहे थे. उन पर विष का प्रभाव नहीं हुआ. कालिया ने अपने दांतों से गरूड़ पर प्रहार किया और पकड़ लिया.

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