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अपने सखा ग्वाल बालों की यह बात सुनकर भगवान श्रीकृष्ण और बलराम दोनों ही अपने मित्रों को प्रसन्न करने के लिए उनको साथ लेकर ताड़ वन के लिए चल पड़े. वन में पहुँचकर बलराम ने पेड़ों को जोर से हिलाकर बहुत से फल नीचे गिरा दिए.

जब गधे के रूप में रहने वाले धेनुकासुर ने फलों के गिरने की आवाज सुनी तो वह बलराम को मारने दौड़ा. वह बड़ा बलवान था. उसकी गति से पृथ्वी और पर्वत डोलने लगते थे. धेनुकासुर ने अपने पिछले पांवों से जोरदार दुलत्ती बलरामजी को मारी.

धेनुकासर इतना बलशाली था कि उसके आघात से किसी के भी शरीर के टुकड़े हो जाते थे लेकिन बलरामजी उस आघात से विचलित नहीं हुए. उसने दोबारा अफना बल समेटा और फिर से बलरामजी पर दुलत्ती चलाई.

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