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शुक्राचार्य असुरों के गुरू क्यों बने थे और वह उनकी सहायता क्यों करते थे, इसके पीथे एख लंबी कथा है. देवगुरू बृहस्पति के पिता अंगीरस द्वारा शुक्राचार्य के साथ बड़ा भेदभाव हुआ था.

बृहस्पति और शुक्राचार्य दोनों अंगिरस के शिष्य थे और साथ-साथ अध्ययन करते थे लेकिन अंगीरस ने शिक्षा देते समय शुक्र के साथ भेदभाव किया था. अपने पुत्र बृहस्पति को उन्होंने ज्यादा शिक्षा दी.

इससे दुखी होकर शुक्र कश्यप की शरण में गए थे. शुक्र ने अपनी पीड़ा कश्यप से बताई और उन्हें शिक्षा देने का अनुरोध किया था. कश्यप ने समझाया था कि शिव विश्व के गुरू हैं. उनसे श्रेष्ठ कोई गुरू नहीं. तुम उन्हें प्रसन्न करो.

कश्यप की युक्ति पर शुक्र ने कैसे महादेव से मृत संजीवनी विद्या सीखी. यह प्रसंग बड़ा सुंदर है किंतु लंबा है. शुक्राचार्य को शिवजी के वरदान की कथा को कुछ देर में विस्तृत रूप में अगली पोस्ट में सुनाउंगा.

संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली

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