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उन्होंने अंधक को समझाने का बहुत प्रयास किया पर वह तो मानने को राजी ही न था. महादेव ने उसे पराजित कर दिया किंतु यह सोचकर वध नहीं किया कि शायद उसे सदबुद्धि आ जाए.
अंधकासुर के सिर पर काल सवार हो गया था. उसने भोलेनाथ की कृपा का मर्म नहीं समझा. प्रतिशोध में जलते अंधकासुर ने पार्वतीजी के अपहरण की योजना बनाई. वह मौके की प्रतीक्षा में था.
एक दिन उसे पता चला कि शिवजी अपने गणों के साथ कैलाश से दूर गए हैं तो वह कैलाश आया और देवी का हरण करने की कोशिश की. देवी ने अपनी शक्तियों के साथ उससे संघर्ष किया. किंतु अंधकासुर भी तो उनके और महादेव का एक अंश था.
इसलिए उसे पराजित करना आसान न था. देवी ने इंद्र से सहायता मांगी. इंद्र अपनी सेना का साथ आए और भयानक संग्राम छिड़ा लेकिन अंधक पर विजय करना सरल न था. देव सेना पराजित होने लगी.
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