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अगस्त्य ने कहा- सृष्टि के कल्याण के लिए जो भी संभव हो मैं वह करने को तैयार हूं, आप मुझे राह बताइए. ब्रह्मा जी ने कहा यदि कैलास पर्वत से कावेरी को भारत भूमि के दक्षिण में ले आया जाए तो इस संकट का निदान हो सकता है.

यह एक दुष्कर कार्य था पर ब्रह्मा जी ने यह कहकर इसे थोड़ा आसान बना दिया कि आपको पूरी नदी नहीं लानी है. बस कैलास की थोड़ी हिम या बर्फ ही अपने कमंडल में लानी होगी. उसी से कावेरी यहां पर स्वयं प्रकट हो जायेंगी.

अगस्त्य मुनि कैलास पर्वत की और चल पड़े. अगस्त्य अपने तपोबल से शीघ्र ही कैलास पर्वत पर जा पहुंचे. बिना देर लगाये अपने कमंडल में कैलास पर्वत की बर्फ भरी और सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित दक्षिण दिशा की ओर लौट चले.

मार्ग में उन्हें ध्यान आया कि शीघ्रतावश ब्रह्माजी से यह पूछना ही भूल गए कि कैलास पर्वत से लाये हिमजल का क्या करना है? कावेरी का उद्गम कहां रहेगा. यह सब विवरण तो पूछा ही नहीं.

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