February 18, 2026

अधिकमास की सुनकर व्यथा, श्रीहरि ने दिया पुरुषोत्तम नामः अधिकमास या मलमास की कथा

shree krishna
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चंद्र वर्ष सूर्य वर्ष के मुकाबले 11 दिन 3 घड़ी और 48 पल छोटा होता है. इस तरह गणना का संतुलन बिगड़ गया. चंद्रमा और सूर्य के साथ ग्रहों को भी असुविधा होने लगी. ब्रह्माजी ने अधिकमास की व्यवस्था दी.

प्रत्येक तीन वर्ष के उपरांत एक अधिकमास होने लगा. सभी मास प्रत्येक वर्ष अपने क्रम से आते इस कारण हर मास के स्वामी निर्धारित थे लेकिन अधिकमास का कोई स्वामी ही न था.

स्वामीहीन अधिकमास दुखी रहने लगा क्योंकि अन्य मासों ने मिलकर उसे शुभ की गिनती से बाहर कर दिया था. शुभकार्यों के लिए अधिकमास वर्जित समझे जाने लगे.

एक बार अधिक मास विष्णुलोक पहुंचे और उन्हें अपनी व्यथा सुनाई. उन्होंने भगवान श्रीहरि से अनुरोध किया कि हे प्रभु सभी माह अपने स्वामियों के आधिपत्य में हैं. मास स्वामियों से प्राप्त अधिकारों के कारण वे स्वतंत्र एवं निर्भय रहते हैं.

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