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दोनों की बातें सुन तीसरा व्यक्ति चुपचाप बैठा रहा. दोनों ने पूछा- तुमने भी सपना देखा? तब वह बोला- सपने में ऐसा कुछ भी नहीं देखा न कहीं गया और न ही मुझे महात्मा दिखे लेकिन रात में जब मेरी नींद टूटी तो मैंने रोटी खा ली.

दोनों ने गुस्से से भरकर कहा- तुमने ये क्या अनर्थ किया. ऐसा करने से पहले तुमने हमें बताया क्यों नहीं.

तीसरे ने कहा- कैसे बताता, तुम दोनों अपने-अपने सपने में इतने दूर जो चले गए थे. और कल ही तो गुरुजी ने हमें बताया था कि आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान का महत्व समझना चाहिए.
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2 COMMENTS

  1. सच बात . समाज में संतोने प्रबोधन काही कार्य किया है ढोंगी पंखण्डियों से बचाव करने के लिये। जिसकी आज भी जरुरत है।

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