March 5, 2026

शत्रु यदि वीर है तो उसकी वीरता का भी होना चाहिए पूरा सम्मानः आज के गीता ज्ञानअमृत में प्रथम अध्याय के श्लोक 5 व 6 का दर्शन

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“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”।।

श्रीमद् भगवद्गीता के प्रथम अध्याय के प्रारंभिक श्लोकों में युद्ध आरम्भ होने से पूर्व के “दुर्योधन-द्रोण संवाद” का वर्णन है, जिसे सुनने की इच्छा धृतराष्ट्र ने व्यक्त की है।

श्लोक संख्या एक से छह में दुर्योधन द्वारा पांडव सेना का निरीक्षण और पांडव सेना के वीर योद्धाओं का बखान है.

कल तक हमने प्रथम अध्याय के एक से चार श्लोकों तक की व्याख्या और उसका दर्शन समझने की कोशिश की.

आज श्लोक संख्या पांच एवं छह में दुर्योधन द्वारा पांडव पक्ष के कई अन्य ऐसे वीरों का बखान देखेंगे.

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