January 28, 2026

विवाह में आपने मांगलिक दोष का जिक्र सुना होगा. क्या है मांगलिक दोष,और दोष दूर करने के सरल उपाय

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विवाह की चर्चा के दौरान हम एक बात कई बार सुनते हैं- वर मंगला है या कन्या मंगली है. इस कारण विवाह में बाधा आती है, विवाह नहीं भी होते हैं.

आज हम आपको इसी मंगल दोष के बारे में बता रहे हैं. मंगल ग्रह भी अन्य ग्रहों की भांति कुण्डली के बारह भावों में से किसी एक भाव में स्थित होता है.

सप्तम भाव से दाम्पत्य या विवाहित जीवन का विचार किया जाता है. अष्टम भाव से दाम्पत्य जीवन के मांगलिक सुख को देखा जाता है. इन भावों में मंगल का अनुकूल नहीं होना शुभ नहीं है.

मांगलिक दोष क्या है?

मंगल का दांपत्य जीवन पर बड़ा असर होता है. यदि जन्मकुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में मंगल स्थित हो तो उस व्यक्ति को मांगलिक कहा जाता है.

इसी तरह यदि राशि (चंद्रमा) से भी पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें घर में मंगल हो तो उसे भी मांगलिक प्रभाव ही माना जाना चाहिए.

जिनके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भाव में मंगल हों तो वर को पूर्ण मंगला और कन्या को पूर्ण मंगली माना जाता है. ऐसे लोगों को विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है.

मांगलिक लोगों के विवाह के समय में क्या हो विचारः
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