June 19, 2026

कैसे जानें कि क्या कुल में कोई प्रेत है?

pret-yoni-garud-puran.jpg

कुल के प्राणी का प्रेत हो जाना एक बड़ी बाधा भी है और कुयोग भी. यदि पितर प्रेत हो जाएं तो वह परिवार कभी फलता-फूलता नहीं. जब तक पितर अतृप्त रहें उस परिवार के सदस्यों की तरक्की रूक जाती है. काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं. बीमारी घेरे रहती है और कई बार परिवार में असमय मृत्यु भी होती है. इसे पितृदोष कहते हैं.

कैसे बनते हैं प्रेत, कैसे होगी मुक्ति?

 

pret-yoni-garud-puran.jpg
Garuda and Narayan

अब आपको गरूड़ पुराण की एक कथा सुनाते हैं कि मनुष्य प्रेतयोनि क्यों लेता है? उससे मुक्ति कैसे होती है?

धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-

[sc:fb]

प्रभु शरणं के पोस्ट  सरलता से पढ़ने के लिए प्लेस्टोर से  PRABHU SHARNAM  App डाउनलो़ड कर लें. यह आपकी दैनिक पूजा से लेकर हर तरह के धार्मिक कार्य में सहयोगी साबित होगा. फ्री ऐप है. एक बार देखिए तो सही. आप कह उठेंगे कि इसी की जरूरत थी. 

Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

बात सतयुग की है. बंग देश में बभ्रुवाहन नाम का राजा था. कहते हैं उसके राज्य में कोई भी पापी नहीं रहता था. राजा धर्मालु था और बहुत वीर था. एक बार राजा सौ घुड़सवार सैनिकों के साथ शिकार खेलने गया.

कुछ दूर जाने पर राजा बभ्रुवाहन को नन्दनवन के समान एक घना वन नजर आया. यह वन बिल्ब, मंदार, खदिर, कैथ तथा बांस के वृक्षों से भरा हुआ था. वह जलरहित वन भयंकर और विशाल क्षेत्र में फ़ैला हुआ था. राजा वन में शिकार करने लगा.

उसे एक हिरण दिखा. राजा ने एक हिरन की कमर में तीर मारा. तीर लगने से घायल मृग बडी तेजी से दौडा. राजा ने मृग का पीछा किया. घायल हिरण के पीछे पीछे भागता राजा इस वन से दूसरे घनघोर वन में पहुंच गया.

See also  शिवजी की काशी में एक शिवभक्त स्वयं बन बैठा शिव, श्रीहरि और गणेशजी ने उसे कैसे किया ठीक

राजा अपने साथियों से भटक चुका था. वह और उसका घोड़ा दोनों बहुत थक गए थे. प्यास से दोनों व्याकुल थे.  राजा सरोवर को खोजने लगा. राजा ने ध्यान लगाकर सुना तो उसे हंसों और सारस पक्षियों की आवाज सुनाई दी.

अगले पन्ने पर जानें राजा को प्रेतों ने क्यों घेरा. प्रेतों ने उसे क्या लक्षण बताए. प्रेतयोनि के क्या कारण बताए.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.