क्या श्रीकृष्ण को भजने से हो सकता है कल्याण, संतों के प्रश्न पर ब्रह्माजी का ज्ञानः अद्भुत हैं श्रीकृष्ण मंत्र- जरूर पढ़ें

क्या श्रीकृष्ण को भजने से हो सकता है कल्याण, संतों के प्रश्न पर ब्रह्माजी का ज्ञानः अद्भुत हैं श्रीकृष्ण मंत्र- जरूर पढ़ें

123

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से save कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर whatsapp कर दें.

जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी। इस लाइऩ के नीचे फेसबुकपेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे.भगवान किसे मानें, किसे भजें जिससे पूर्ण ज्ञान प्राप्त हो जाए. परमात्मा को, देवता हैं या कोई अऩ्य शक्ति को, इस पर बहुत से ऋषियों को एक बार कौतूहल हुआ.

वे ब्रह्माजी के पास पहुंचे उनसे इस प्रश्न के निवारण के लिए. ब्रह्माजी और ऋषियों के बीच चर्चा का एक सुंदर प्रसंग प्रश्न उपनिषद में आया है. छोटा सा प्रसंग है आनंद लीजिए जिसमें ब्रह्माजी श्रीकृष्ण के बारे में बता रहे हैं.

एक बार ऋषियों ने ब्रह्माजी से पूछा- हमें बताइए कि किस देवता के तत्व को पूरा समझ लेने से संपूर्ण ज्ञान प्राप्त हो सकता है. किसके द्वारा प्रेरित होकर संसार आवागमन के चक्र में पड़ा रहता है?

ब्रह्माजी ने कहा- स्वाहा की माया शक्ति से प्रेरित होकर संसार आवागमन के चक्र में पड़ा रहता है. इसलिए गोपीजन वल्लभ श्रीकृष्ण के तत्व को पूरा समझ लेने से भी संपूर्ण ज्ञान प्राप्त हो सकता है.

मुनियों ने पूछा- श्रीकृष्ण कौन हैं? गोपीजन वल्लभ कौन हैं, स्वाहा कौन हैं? हमें इनके बारे में विस्तार से बताएं.

ब्रह्माजी बोले- जो पाप का हरण करते हैं वह कृष्ण हैं. गौ, भूमि और वेदवाणी के ज्ञाता और अविद्या कला के निवारक हैं गोपीजन वल्लभ. इनके नाम का जो ध्यान करता है वह अमृत स्वरूप को प्राप्त होता है.

मुनियों ने पूछा- भगवन! श्रीकृष्ण का ध्यान करने योग्य रूप कौन सा है? उनके नाम के अमृत का स्वाद लेने के लिए किस प्रकार से भजन करना चाहिए, यह भी बताएं.ब्रह्माजी बोले- भगवान के ध्यान करने योग्य रूपों के बारे में सुनो. ग्वाल बाल जैसा उनके वेश है, श्याम है शरीर, अवस्था किशोर है, धाम है कल्पवृक्ष.

श्रीकृष्ण प्रकृति के तत्व के साथ हैं. गौ, पृथ्वी उन्हें सबसे प्रिय हैं.

ऋषियों ने आगे पूछा- क्या श्रीकृष्ण सिर्फ इसी रूप में हैं, या उनके अन्य स्वरूप भी हैं. हमें सबकुछ जानना है. प्रभु विस्तार से सबकुछ बताएं जो आपको ज्ञात है.

ब्रह्माजी बोले- उनके समस्त स्वरूप का थाह लगाना तो संसार में किसी के लिए भी संभव नहीं है. भक्तवत्सल भगवान किस रूप में भक्तों के लिए प्रकट हो जाएं, कौन बता सकता है. उन्हें तो जिस रूप में खोजोगे उस रूप में मिल जाएंगे.

ऋषियों ने पूछा- जिस रूप में खोजें उस रूप में मिल जाएंगे! यह तो बड़े कौतूहल का विषय हो गया.

ब्रह्माजी बोले- जिसने संसार के समस्त आश्चर्य उत्पन्न किए हों, जो उन आश्चर्यों का निवारण कर रहे हों उनके स्वरूप के विषय में कौतूहल तो होगा ही.

ऋषियों ने फिर से प्रश्न कर दिया- आपकी बातों में कुछ भी स्पष्ट नहीं हो रहा. इसे सरलता से बताएं.

ब्रह्मजी ने कहा- उन्हें जिस रूप में खोजा जाता है उस रूप में मिल जाते हैं. संसार में उन्हें सभी ईश्वर के रूप में ही नहीं भजते. कोई उन्हें पुत्र रूप में, कोई सखा रूप में, कोई शिष्य रूप में कोई प्रेमी रूप में भजता-पूजता है. वह उसे उसी रूप में दर्शन दे देते हैं.

दर्शन ही क्यों वह तो उस रूप में उसके यहां वास करने लगते हैं. पृथ्वीलोक पर घूम-घूमकर पता करो उन्हें न जाने किस-किस रूप में लोग भज रहे हैं और तुम्हें घर-मंदिर में दिख जाएंगे.ऋषियों ने कहा- हे ब्रह्मदेव! आपके द्वारा बताई बातों से हमारी जिज्ञासा तो बढ़ती जा रही है. निवारण कैसे हो? प्रभु के रूप अनंत हैं पर उनकी कोई तो वेश-भूषा, पहचान होगी?

ब्रह्माजी बोले- यदि तो भ्रम है तुम्हारा. लीलाधर हैं श्रीकृष्ण. वेशभूषा और पहचान कौन तय कर सकता है. कभी ग्वाल-बाल हैं तो कभी नटखट बालक. कभी दुष्टों के संहारक हैं तो कभी विश्वस्वरूप. जिसका आदि अंत ही नहीं, उसके स्वरूप कैसे बताउं.

ऋषियों ने प्रार्थना की- फिर भी कुछ तो राह दें जिससे हम उनका ध्यान कर सकें. उन्हें प्राप्त कर सकें, उनमें विलीन हो सकें.

ब्रह्माजी ने कहा- श्रीकृष्ण को पाना है तो सबसे पहले स्वयं को भूला दो. उनकी जो अवस्था जो स्वरूप तुम्हें प्रिय हो उसका ध्यान करके उनका नाम जपो. मैं भी यही करता हूं.

यह प्रसंग प्रश्न उपनिषद में आया है. सच है श्रीकृष्ण के जितने रूप हैं उतने शायद ही किसी के हों. हर रूप की उपासना का अलग महत्व है. संतानहीन बालरूप में भजते हैं. शीघ्र विवाह के लिए राधानाथ स्वरूप.

क्रूर ग्रह शांति के लिए गोवर्धनधारी स्वरूप, ऐश्वर्यहीन लड्डू गोपाल स्वरूप को भजकर लाभ पाते हैं. कारोबार में लाभ के लिए कालियामर्दक तो रोगनाश के लिए माखनचोर स्वरूप को और प्रेम विवाह के लिए राधानाथ विग्रह को भजते हैं.

भगवान श्रीकृष्ण के प्रत्येक कल्याणकारी स्वरूप को भजने के अलग-अलग मंत्र हैं. ये मंत्र बहुत छोटे और बहुत प्रभावी हैं. इन्हें जपना भी सरल है. आप ऐसे मंत्रों को जरूर देखें हमारे एप्प- Krishna Leela में.

प्ले स्टोर में सर्च करें Krishna Leela. आपको पीले रंग की तस्वीर में माखन की हांडी के साथ बालकृष्ण दिखेंगे. वह एप्प डाउनलोड कर लें. आप देखिए तो सही,अद्भुत मंत्रों का संग्रह है इसमें जो आपकी परेशानियों को दूर कर देंगे.

अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प. लेटेस्ट कथाओं के लिए प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प डाउनलोड करें।

Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

ये भी पढेंः

जो चाहोगे वह पाओगे- सारी इच्छाएं पूरी कराने वाला मंत्र

चंद सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है.

मीठा बोलने वाले सभी शुभचिंतक ही नहीं होतेः महाभारत की नीति कथा

error: Content is protected !!