March 19, 2026

भक्ति बुद्धि से नहीं भाव से प्राप्त होती है- प्रेरक कथा

chaitanya mahaprabhu
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चैतन्य महाप्रभु अपने शिष्यों के साथ कही जा रहे थे. उन्होंने एक गांव में देखा कि कुछ लोग एक स्थान पर बैठे हैं और युवक गीता के श्लोक उन्हें सुना रहा है और स्वयं रो रहा है.

उस व्यक्ति के संस्कृत के उच्चारण से चैतन्य महाप्रभु को यह आभास हो गया कि इस व्यक्ति को संस्कृत का ज्ञान नहीं है लेकिन उन्हें आश्चर्य हुआ कि फिर भी वह वांच रहा है और रो रहा है.

चैतन्य उसके पास पहुंचे और पूछा- युवक क्या तुम जो वांच रहे हो उसका अर्थ भी जानते हो? रोने के कारण युवक की आंखें भरी हुई थीं. उसने मुश्किल से आंसू रोकते हुए कहा- नहीं प्रभु मुझे इसका अर्थ नहीं ज्ञात है.

चैतन्य महाप्रभु का आश्चर्य और बढ़ गया. उन्होंने पूछा- यदि तुम इसका अर्थ नहीं समझते हो तो फिर इस तरह से रोने का क्या कारण है?

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