विलासिता के ताड़ के पेड़ बनने से अच्छा है, भक्ति की घास बन जाना जो पैरों को ताप से बचाती तो हैः प्रेरक कथा

लेटेस्ट कथाओं के लिए प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प डाउनलोड करें।
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
मुगल दरबार के गायक तानसेन थे तो अच्छे गायक लेकिन उन्हें अपनी कला का घमंड हो गया था. राजदरबार में होने से दो अवगुण भी आए थे. एक तो स्वयं अकबर की चापलूसी करते, दूसरी यदि कोई उनकी चापलूसी करता तो उसको आनंद लेकर सुनते.
उस समय ऐसे गायकों की भी कमी न थी तानसेन से भी अच्छा गाते थे लेकिन वे लोग सिर्फ भगवत भजन में लीन रहते. किसी राजा के लिए प्रशंसा गीत गाकर धन कमाने से ज्यादा आनंद उन्हें अपने स्वर से प्रभु भक्ति करके दरिद्र रहने में आता था.
वल्लभ संप्रदाय के आचार्य विठ्ठलनाथजी के पास ऐसे कई भजन गायक थे जो प्रभु सुमिरन में मगन रहते. एक बार तानसेन का मुलाकात विठ्ठलनाथजी से हुई. तानसेन इशारों में अपनी प्रशंसा से शुरू करते हुए मुगल दरबार में अपनी पकड़ तक का अहसास कराने लगे.
विठ्ठलनाथजी समझ गए. उन्होंने तानसेन को गीत सुनाने को कहा. तानसेन ने वह गीत सुनाया जो अकबर को बहुत पसंद था. प्रसन्न होकर विठ्ठलनाथजी ने तानसेन को एक हजार रूपये और दो कौड़ियां ईनाम के तौर पर दीं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.तानसेन ने दो कौड़ियों के बारे में पूछा तो विठ्ठलनाथ बोले- आप मुगल दरबार के मुख्य गायक हैं इसलिए हजार रूपये का ईनाम आपके ओहदे को देखते हुए था. ये दौ कौड़ियां मेरी ओर से आपका गायन की सच्ची कीमत है.
तानसेन आगबबूला होने लगे. विठ्ठलनाथजी ने धैर्य रखने को कहते हुए गोविंदस्वामी जी को गायन आरंभ करने का इशारा किया. गोविंदस्वामी ने एक भजन छेड़ा. वह भक्ति में विभोर हो गए. पीछे-पीछे तानसेन समेत वहां बैठे सभी लोग झूमने लगे.
गीत समाप्त हुआ तो जैसे तानसेन की तंद्रा टूटी. गोविंदस्वामीजी को प्रणाम करने के बाद वह विठ्ठलस्वामी के सामने नतमस्तक हो गए और अपने व्यवहार के लिए क्षमा मांगते हुए कहा आपने मेरी सच्ची कीमत लगाई थी.
विठ्ठलस्वामी बोले- तानसेन तुम उच्च कोटि के गायक हो. माता सरस्वती की तुमपर विशेष कृपा है लेकिन तुमने अपना सारा संगीत अकबर को खुश करने के लिए समर्पित कर दिया है. तुम्हारा दायरा बहुत छोटा हो चुका है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.गायन में तुम गोविंदस्वामी से श्रेष्ठ हो लेकिन यह प्रभु को प्रसन्न करने के लिए गाते हैं. यह उनको प्रसन्न करने के लिए गाते हैं जो संसार चलाते हैं. इनके संगीत का दायरा व्यापक है.
तानसेन को बात समझ में आ गई थी. मित्रों, यदि हम पर ईश्वर ने कोई विशेष कृपा की है तो उसके पीछे ईश्वर का उद्देश्य होता है हमें परखना. वह देखना चाहते हैं कि क्या हम उसके योग्य हैं? हम उस विशेष कृपा का प्रयोग कैसा कर रहे हैं.
आसमान छूते ताड़ के पेड़, जिसकी छाया किसी को नहीं मिलती, बनने से अच्छा है दूर तक फैली घास बन जाना जो धरती के ताप से पैरों को तो बचाती है. भक्ति वही घास है जबकि विलासिता ताड़ का पेड़.
यदि प्रभु के दिए अनमोल उपहार का एकमात्र उद्देश्य भौतिक सुख प्राप्त करना रह जाएगा तो उसमें धीरे-धीरे ह्रास होगा और अंततः हम उससे वंचित हो जाएंगे क्योंकि भौतिक सुख अस्थाई हैं तो फिर उस सुख का साधन कैसे स्थाई होगा!
संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्
कहानी पसंद आई तो हमारा फेसबुक पेज https://www.facebook.com/PrabhuSharanam जरूर लाइक करें. हम ऐसी कहानियां देते रहते हैं. पेज लाइक करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा.