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सुंदरकांड हनुमानजी को विशेष प्रिय क्यों है?
तुलसीदासजी जब श्रीराम कथा लिख रहे थे तो हनुमानजी उनकी एक-एक चौपाई को देख-विचारकर स्वयं उस पर सहमति देते। तुलसीदास जी हनुमानजी की भक्तिभाव से इतने मुग्ध हो गए कि एक बार ऐसा भी हुआ कि उनके मन में हनुमानजी के प्रति श्रद्धा श्रीराम से भी ज्यादा हो गई।
यह श्रीरामजी की लीला थी। वह चाहते हैं कि उनके भक्त का स्मरण ज्यादा हो। हनुमानजी तो श्रीराम के हृद्य में रहते हैं। हृद्य में क्या विचार आए उन्होंने तत्काल पढ़ लिए और तुलसी बाबा के मन में नई प्रेरणा दी।
रामचरितमानस में सुंदरकांड इसी का प्रतीक समझ में आता है। उसमें तुलसीदासजी ने हनुमानजी की महिमा का अद्भुत चित्रण किया है। वह भगवान श्रीराम की प्रेरणा से हुआ। हनुमानजी ने प्रभु का आदेश स्वीकार लिया।
इसलिए सुंदरकांड हनुमानजी को विशेष रूप से प्रिय है। हनुमानजी की स्तुति का आरंभ पहले श्रीराम के नाम स्मरण के बाद ही करना चाहिए।
“जय सियाराम जय जय हनुमान, संकटमोचन कृपा निधान” हनुमानजी को ऐसे स्मरण करने की आदत डाल लें तो उत्तम है।
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