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अब तुम्हें धरती पर पहाड़ की अंधेरी गुफा में उल्लू बनकर रहना होगा, अपने ही शरीर का मांस नोच-नोच कर खाना होगा. इस मन्वंतर के बीतने तक तुम घोर नरक में पड़े रहोगे. बाद में कुत्ते की योनि मिलेगी.

यमराज का इतना कहना था कि भुवनेश गुफा में उल्लू बन कर आ गिरा. गुफा में आते ही राजा भुवनेश का शव भी उसके सामने आ गिरा. उल्लू बना राजा भुवनेश भूख से बैचेन होकर अपनी ही लाश देखकर सोच में पड़ गया.

उल्लू अपने ही लाश खाने के लिए बढा ही था कि ठीक इसी समय उधर से एक चमचमाता सुनहरा विमान गुजरा. इस विमान पर हरिमित्र सवार थे. श्रीविष्णु के दूत उन्हें सम्मान सहित स्वर्ग ले जा रहे थे.

संत हरिमित्र ने राजा भुवनेश की लाश पहचान ली. एक उल्लू उसे खाने जा रहा था यह दुर्गति देख उनको राजा पर दया आई. विमान को रुकवा दिया और करीब जा पहुंचे.

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