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जनाबाई तुरंत जाकर वापस लौटीं. भक्त नामदेव जी के यहां सभी भक्त जमा थे. उन्होंने यह घटना सभी को सुनाई. सभी ने आकर पैरों के उस निशान के दर्शन किए.

उस मंडली में बड़े बड़े संत और महात्मा थे, वे तुरंत पहचान गए कि ये तो साक्षात महामाया के पांव के निशान हैं.

नामदेव ने कहा जनाबाई तुम धन्य हो जिसके लिए स्वयं महामाया ने आकर कपड़े धोए.

इस घटना के बाद से जनाबाई की दशा ही विचित्र हो गई.

वह भक्ति में इतनी लीन हो गईं, कि उनके रोम रोम से हर समय पवित्र भगवन्नाम निकलने लगा. फिर तो ये रोज की कहानी हो गई.

घर के काम काज करते करते जनाबाई विह्वल हो जाया करती थीं. नटखट नागर प्रभु विट्ठल ऐसे की समय की प्रतीक्षा में बैठे रहते थे.

जैसे ही जनाबाई भक्ति और प्रेम में अपनी सुधबुध खोती थीं. भगवान आकर उनकी जगह काम करने लगते थे.

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