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धनुः

धनु राशि का स्वामी बृहस्पति है. बृहस्पति देवगुरू हैं. आपको सूर्य को जल देने के पश्चात ऊं नमो भगवते वासुदेवाय की एक माला जपनी है. फिर ऊं बृं बृहस्पत्यै नमः की एक माला जपनी है.

दानः गाय को चारा अवश्य दें. आपको चने की दाल, चीनी, पीले फल जैसे केला, पीले वस्त्र आदि का दान करना चाहिए. किसी ब्राह्मण या गुरूजन को आदर सहित मीठा भोजन अवश्य कराएं.

मकरः

इसी राशि में सूर्य के प्रवेश के कारण तो मकर संक्रांति हैं. इस राशि के लोगों के लिए सबसे खास दिन है मकर संक्रांति. आपकी राशि के स्वामी शनि है. आपको सूर्यदेव को जल देने के बाद ऊं शं शनैश्चरायै नमः की एक माला जपनी है. उसके बाद ऊं नमः शिवाय एवं ऊं हं हनुमते नमः की एक माला का जप करना है.

दानः काली उड़द, काला तिल, सरसों तेल, किसी जरूरतमंद व्यक्ति को काला कंबल, जूते आदि दान करना चाहिए. कल खिचड़ी और काले तिल के लड्डू का दान आपके लिए विशेष फलदायी रहेगा.

कुंभः

कुंभ के स्वामी भी शनि ही हैं. सूर्यदेव को जल चढ़ाने के बाद आपको ऊं शं शनैश्चरायै नमः की एक माला जपनी है. ऊं नमः शिवाय की भी एक माला जपनी है.

दानः काली उड़द, काला तिल, सरसों का तेल, किसी जरूरतमंद को काला कंबल दान करना चाहिए. उड़द के दाल की खिचड़ी, काले तिल का लड्डू दान करना चाहिए.

मीनः
आपकी राशि का स्वामी बृहस्पति है. सूर्य को जल देने के पश्चात ऊं नमो भगवते वासुदेवाय की एक माला का जप करें. ऊं बं बृहस्पत्यै नमः की एक माला जप करें.

दानः गाय को चारा अवश्य दें. आपको चने की दाल, चीनी, पीले फल जैसे केला, पीले वस्त्र आदि का दान करना चाहिए. किसी ब्राह्मण या गुरूजन को आदर सहित मीठा भोजन अवश्य कराएं.

खिचड़ी का दान और आहार क्यों जरूरी है आज अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

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