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भयंकर युद्ध हुआ. वीरसेन मारे गए तो भयभीत होकर मनोरमा ने लड़ाई रोक दी और महामंत्री विदल्ल तथा सुदर्शन के साथ भरद्वाज मुनि के आश्रम में शरण ली.
युद्धजित के सैनिक यहां भी पहुंचे पर मुनि के भय से भाग गये. सुदर्शन मां और महामंत्री के साथ यहां रहने लगा. बालक सुदर्शन ने किसी को एक दिन महामंत्री विदल्ल को क्लीव यानी डरपोक कहते सुना.
बालक ने यह शब्द सुना तो उसकी जुबान पर चढ गया. वह सोते जागते क्लीव रटने लगा. क्लीव से फिर क्लीं. दैवयोग से सुदर्शन हमेशा क्लीं रटने लगा. क्लीं मां काली का बीजमंत्र है. इस तरह रटने से सुदर्शन को वह काली मंत्र सिद्ध हो गया.
भरद्वाज मुनि ने भी सुदर्शन को अस्त्र-शस्त्र और शास्त्र की हर प्रकार की शिक्षा दिलवाई. एक बार जंगल में ही भगवती कृपा से सुदर्शन को दिव्य धनुष और तीरों से भरा तरकश भी मिल गया.
युवा सुदर्शन अब शक्ति संपन्न हो गया. इसी बीच काशी के राजा सुबाहु की जगदंबा भक्त बेटी शशिकला ने एक सपना देखा. सपने में भगवती ने उसे सुदर्शन से विवाह का आदेश दिया.
शशिकला ने देवी के आदेश पर सुदर्शन को अपना पति मान लिया और अपने पिता सुबाहु को बता दी. सुबाहु नाराज होकर बोले- असहाय जंगली से विवाह हमारी शान के खिलाफ है. बेटी न मानी तो उन्होंने स्वयंवर की घोषणा कर दी.
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