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खिन्न राजा मंदिर में चले गए और भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने सात रातों तक आराधना पूजा करते रहे. भगवान ने उन्हें सपने में दर्शन देकर इस समस्या का समाधान भी बता दिया.

भगवान ने कहा कल सुबह तुम्हारे नगर में एक बूढा ब्राह्मण घूमता हुआ आयेगा. उसकी बात में तुम्हें समाधान मिल जायेगा. भोर होते ही एक ब्राह्मण सुदरिद्र आया. राजा अपने दो विश्वस्त मंत्रियों के साथ उससे मिलने आया.

बूढे ने एक श्लोक पढा. श्लोक का अर्थ था- जो बहुत पहले कुरुक्षेत्र में श्रेष्ठ ब्राह्मण के रूप में, मंदसौर में शिकारी बनकर, कालंजर पर्वत पर हिरन की योनि में और मानसरोवर में चकवा बनके जन्मे थे, वे ही आज सिद्ध होकर यहां राज कर रहे है.

श्लोक सुनते ही राजा ब्रह्मदत सिंहासन से गिरकर अचेत हो गए. सैनिकों ने ब्राह्मण को पकड़ लिया. पूछताछ शुरू हो गयी. ब्राहमण ने बताया कि उसने अपने बेटों के कहने पर श्लोक कहा जिससे राजा की यह दशा हुई.
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