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उसकी बात समाप्त होती कि चौथा उतावलेपन से बोला- मैंने तो अपने गुरू से मरे में जान डालने की विद्या सीखी है. मैं उसमें जान डाल दे सकता हूँ. कोई परेशानी की बात ही नहीं है अब तो.

सबने मिलकर कहा अद्भुत. विचार हुआ कि सबने अलग-अलग अपनी विद्या का प्रयोग किया है. क्यों न एक साथ मिलकर सारी शक्तियों का प्रयोग करके एक बार आजमा लिया जाए.

विचार जम गया. चारों आपनी विद्या के संयुक्त प्रयास की परीक्षा को तैयार हो गए. फिर वे अपनी विद्या की परीक्षा लेने जंगल में गये. वहां उन्हें एक मरे हुए शेर की हड्डियां मिलीं.
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