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ब्रह्मा की विविध प्रकार की स्तुति से शिवा प्रसन्न हुईंं. उन्होंने ब्रह्माजी को इच्छित वरदान दे दिया. देवी ने अपनी भौंहों के मध्य भाग से अपने समान रूप वाली एक स्त्री प्रकट किया और ब्रह्माजी को दिया.
देवी ने ब्रह्माजी को संबोधित करके कहा- हे ब्रह्मा आप मेरे इसी स्वरूप के आधार पर नारी शरीर की रचना करें. पुरुष तत्व और स्त्रीतत्व मिलकर संतति को जन्म देंगे. इस प्रकार मैथुनी सृष्टि की रचना होगी. संतान को जन्म देने का दायित्व स्त्री को होगा और उसके भरण और रक्षा का दायित्व पुरुष का.
समय आने पर मैं दक्ष की पुत्री के रूप में आपकी दूसरी प्रार्थना भी स्वीकार करुंगी. मेरा वरदान है कि आपके द्वारा रचे नारी के अंश के बिना संसार में संतति वृद्धि (संतान जन्म देना) संभव नहीं होगा.
ब्रह्माजी ने महादेव के आशीर्वाद से मैथुनी सृष्टि की रचना की और देवी के आशीर्वाद से प्रजनन की क्षमता नारी के अतिरिक्त किसी को नहीं मिली. (शिव पुराण आधारित)
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संकलन व संपादनः राजन प्रकाश
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