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पिछले जन्म में तू एक केवट की पतिव्रता पत्नी थी, . एक दिन तेरे पति ने चोरी की और सिपाहियों ने तुम दोनों को जेलखाने में बंद कर दिया. सिपाहियों ने वहां उन्होंने तुम दोनों को खाने को भी न दिया.
उन दिनों नवरात्र के दिन थे. अगले कुछ दिनों तक भी उन्होंने जल के अलाव कुछ भी न दिया इस तरह से तुम दोनों का नौ दिन का व्रत हो गया. उस व्रत के प्रभाव से मैं तुम्हें तुम्हें मुंहमांगा वर दे रही हूं, मांगो.
सुमति ने देवी मां से कहा, मां दुर्गा आप मेरे पति को पूरी तरह ठीक कर दें . देवी ने उससे कहा तू अपने एक दिन के व्रत का प्रभाव अपने पति को दे दे. सुमति ने कहा ठीक है और अपने पति को अपने एक दिन के नवरात्र व्रत का प्रभाव दे दिया.
बस एक दिन के ही प्रभाव से उसका पति तुरंत ही चंगा हो गया . सुमति और उसके पति ने मिलकर जगदंबे मां की खूब स्तुति की तो अंतरधान होने से पहले मां ने उसे व्रत विधि बतायी और शीघ्र ही पुत्रवती होने का वर भी दे दिया.
सुमति के स्वस्थ पति ने स्वस्थ पति ने मेहनत कर धन कमाया और समय आने पर सुमति को एक सुंदर सा बेटा हुआ जिसका नाम उसने उदालय रखा.
स्रोत: लोकश्रुत
संकलनः सीमा श्रीवास्तव
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