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इसके लिए बुद्धिमान, विवेकशील और बड़े काम को फुर्ती के साथ करने वाले व्यक्ति की आवश्यकता थी.

शिवगण फुर्तीले तो थे लेकिन उनकी बुद्धिमानी पर सदाशिव सशंकित थे. उन्हें लगा कि कहीं आमंत्रण देने की हड़बड़ी में गणों से देवताओं का अपमान ना हो जाए.

इसलिए महादेव ने इस काम के लिए गणेशजी का चयन किया. गणेश बुद्धि और विवेक के देवता हैं. वह जल्दबाजी में भी कोई गलती नहीं करेंगे.
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