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मैना ने पार्वती से कहा- नारद ने ही तुम्हारी मतिभ्रष्ट की है जो ऐसे भीषण रंग-रूप और लक्षणों वाले वर को पाने के लिए तुमने घोर तप किया. शिव से विवाह का विचार त्याग दो.
पार्वती के माता की बात से दुख हुआ. हिमवान ने मैना को समझाया कि शिवजी का वेष भले ही भयंकर है किन्तु वे स्वयं मंगलदायक हैं.
नारदजी को पता चला कि मैना उन्हें इसका दोषी मानती हैं तो वह आए और उन्होंने पार्वती के पूर्वजन्म में सती होने की बात बताई तब मैना का मन शांत हुआ. मैना हृदय कड़ा करके परिछन को आईं.
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