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जगत के सभी छोटे बड़े पर्वत, वन, समुद्र, नदियां तालाब आदि हिमाचल का निमंत्रण पाकर उस विवाह में सम्मिलित थे. हिमाचल के नगर को सुन्दरतापूर्वक सजाया गया था. बारात का परछन हुआ और सभी बारातियों को जनवासे में ले जाया गया.

पार्वती की माता मैना दूल्हे के परिछन को आरती की थाल लेकर आईं लेकिन जैसे ही शिवजी पर नजर पडी उनका भयानक वेश देखकर वह बेहोशे होकर गिर गईं.

अचानक हो-हल्ला मच गया. हिमवान आए और पत्नी को उठाकर ले गए. मैना ने जिद पकड़ ली कि वह अपनी परम रूपवती पुत्री का विवाह इस औघड़ से नहीं करेंगी.
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