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भगवान श्रीराम ने कहा- आप संसार में मुझे सबसे प्रिय हैं. आपका अगर कोई प्रिय करता है तो वह मेरा ही प्रिय होता है. आपके मन में मुझसे अलग भाव आने ही नहीं चाहिए थे.

फिर श्रीराम ने हनुमानजी द्वारा लाए शिवलिंगो की स्थापना कराई और वरदान दिया- यदि कोई हनुमानजी द्वारा प्रतिष्ठित शिवलिंग की पूजा न कर मेरे द्वारा स्थापित शिवलिंग की पूजा करेगा तो उसकी पूजा व्यर्थ होगी.

हनुमानजी की पूंछ टूटी थी इसलिए प्रभु ने वहां हनुमानजी को छिन्न-पुच्छ(पूंछ), गुप्त पाद(पैर) रूप में गतगर्व(गर्वरहित) निवास करने को कहा.

भगवान श्रीराम ने बजरंगबली की छिन्न-पुच्छ, गुप्तपाद, गतगर्व मुद्रा की प्रतिमा स्थापित करा दी. वह आज भी रामेश्वरम में मौजूद है.

प्रभु ने अपने हिस्से की सारी पूजा भक्त के लिए सुरक्षित कर दी. हनुमानजी की सारी कथाएं जीवन की प्रैक्टिकैलिटी(व्यवहारिकता) का आदर्श स्थापित करती है. आप स्वयं कष्ट में हैं तो दूसरों पर दया करना शुरू कीजिए. यकीन मानिए आपके कष्ट प्रभु हर लेंगे.

जिन लोगों के अहंकार या ज्यादा उग्र होने के कारण काम बिगड़ जाते हैं उन्हें अपने घर में मंगलवार या शनिवार को हनुमानजी की ऐसी प्रतिमा या बड़ा चित्र जरूर लगाना चाहिए.

संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्
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प्रभु प्रेमियों हम सनातन के अनंत सागर से चुन-चुनकर आपके लिए उपयोगी कथाएं लेकर आते हैं. भगवान की प्रेरणा से हिंदुत्व के सार के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से यह कार्य आरंभ हुआ है. अपने धर्म के ज्ञान को प्रचारित प्रसारित करने में आपकी भी भागीदारी होनी चाहिए. आप एप्प का लिंक मित्रों को शेयर करें ताकि वे भी इसका लाभ ले सकें.

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