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दुर्गम ने मांगा- पितामह! यदि आप प्रसन्न हैं तो मुझे सभी वेद प्रदान कर दीजिए. सभी वेदों पर मेरा अधिकार हो जाए. वेदों के साथ ही मुझे ऐसा बल प्रदान कीजिए जिससे देवता, मनुष्य, गंधर्व, यक्ष, नाग, कोई भी मुझे पराजित न कर सके.
ब्रह्माजी ने दुर्गम को इच्छित वर दे दिया. वरदान का प्रभाव ऐसा हुआ कि ऋषि-मुनि वेदों का ज्ञान भूल गए. स्नान, संध्या, हवन, श्राद्ध, यज्ञ जप आदि वैदिक क्रियाएं बंद हो गईं.
सारी पृथ्वी पर हाहाकार मच गया. सारे जगत में अफरा-तफरी मच गई. वर्षा बंद हो गई, चारों ओर अकाल पड़ गया. देवताओं को यज्ञ का भाग मिलना बंद हो गया.
वे शक्तिहीन होकर दैत्यों से पराजित हो गए. अपने प्राण बचाने के लिए असुरों से छिपते हुए वनों में भटकने लगे. ऋषियों ने संकट से मुक्ति के लिए भगवती जगदम्बा की उपासना शुरू की.
भगवती प्रसन्न होकर प्रकट हुईं और दुर्गम से वेदों को छीनकर ऋषियों को दिलाने का आश्वासन दिया. फिर भगवती देवताओं की सेना लेकर दुर्गम का वध करने चल पड़ीं.
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