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अगले कुछ दिनों तक भी उन्होंने जल के अलावा तुम दोनों कुछ भी न दिया. तुम दोनों मेेरी स्तुति करते रहे. इस तरह से तुम दोनों का नौ दिन का व्रत हो गया.

उस व्रत के प्रभाव से मैं तुम पर अत्यंत प्रसन्न हूं और आज तुम्हें मनचाहा वर दे रही हूं. मांगो क्या मांगती हो?

सुमति ने देवी मां से कहा- मां दुर्गा आप मेरे पति को पूरी तरह स्वस्थ कर दें. देवी ने उससे कहा तू नवरात्र के अपने एक दिन के व्रत का प्रभाव अपने पति को दे दे. सुमति ने कहा ठीक है और अपने पति को अपने एक दिन के नवरात्र व्रत का प्रभाव दे दिया.

बस एक दिन के ही व्रतपुण्य के प्रभाव से उसका पति तुरंत ही स्वस्थ हो गया. सुमति और उसके पति ने मिलकर जगदंबे मां की खूब स्तुति की तो अंतर्धान होने से पहले मां ने उसे व्रत विधि बताई और शीघ्र ही पुत्रवती होने का वर भी दे दिया.

सुमति के स्वस्थ पति ने स्वस्थ पति ने मेहनत कर धन कमाया और समय आने पर सुमति को एक सुंदर सा बेटा हुआ जिसका नाम उसने उदालय रखा.

बोलो जयकारा माँ शेरावाली का. बोलो साँचे दरबार की जय.
स्रोत: लोकश्रुत
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