दावात पूजा या चित्रगुप्त पूजा यम द्वितीया को की जाती है. कायस्थ जाति के लोग जिनकी आजीविका कलम से है वे इसे विशेष रूप से करते हैं. दावात पूजा के दिन धर्मराज के दरबार में प्राणियों के कर्मों का हिसाब रखने वाले भगवान श्री चित्रगुप्त की विधि-विधान से पूजा की जाती है.
दावात पूजा की इस पोस्ट में आप जानेंगे-
- दावात पूजा की पूजन सामग्री के बारे में
- दावात पूजा की विधि
- दावात पूजा की कथा
- दावात पूजा को लिखा जाने वाला मंत्र
- दावात पूजा को की जाने वाली भगवान चित्रगुप्त की आरती.
दावात पूजा की तैयारी कैसे करेंः
- दावात पूजा को कलम-दावात-पुस्तक एवं पढ़ने-लिखने से जुड़ी सारी उपयोगी वस्तुओं जैसे पेंसिल, चॉक, स्लेट, कॉपी-रजिस्टर, कागज आदि जरूर लेना चाहिए.
- पांच प्रकार के मौसली फलों से दावात पूजा को भगवान चित्रगुप्त की पूजा करनी चाहिए.
- चंदन, हल्दी, कुमकुम, वस्त्र, अक्षत, दूर्वा, पुष्प, फल, मिठाई, शक्कर, पंचामृत के लिए सामान, मेवा, पान, सुपारी, इलायची, आम का पल्लव, हवन के लिए सामग्री आदि रख लें.
- पूजा स्थान को साफ़ करके एक चौकी या पीढ़े पर कपड़ा वस्त्र बिछाकर श्रीचित्रगुप्तजी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
- उसके बाद दीपक जलाकर श्रीगणेशजी का आह्वान करें और पंचोपचार पूजन करें.
- पंचोपचार का विधिवत वर्णन प्रभु शरणम् ऐप्प में दैनिक पूजन मंत्र कॉलम में देख सकते हैं. ऐप्प को या तो सीधे प्लेस्टोर में Prabhu Sharnam सर्च करके डाउनलोड कर लें या फिर इस लिंक से भी कर सकते हैं-हिंदू धर्म से जुड़ी सभी शास्त्र आधारित जानकारियों के लिए प्रभु शरणम् से जुड़ें. धर्मप्रचार के लिए बना सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् फ्री है.
Android मोबाइल ऐप्प डाउनलोड करने के लिए यहां पर क्लिक करें - भगवान को मुख्य रूप से चन्दन, हल्दी, रोली, अक्षत, दूब,पुष्प व धूप अर्पितकर पूजा की जाती है जिसके मंत्र बहुत सरल हैं.
- यदि पंचोपचार पूजन करने में असमर्थ हैं तो उपलब्ध पूजा सामग्रियों (कुमकुम, अक्षत, पुष्प, फल, मेवा आदि ) में से कुछ अंश सबसे पहले गणेशजी के नाम से समर्पित करें.
- फिर एक माला “ऊं गं गणपत्यै नमः ” मंत्र की जप लें. गणेशजी से क्षमा प्रार्थना कर लें और पूजा आरंभ करने की अनुमति लें.
- चूंकि दावात पूजा साल में एक बार होती है इसलिए ज्यादातर लोग इसे विधि-विधान से करना चाहते हैं. श्री चित्रगुप्त महाराज एवं धर्मराज के पूजन से पहले कलश स्थापना करके वरुण देवता का आवाहन करें.
- फिर गणेश अम्बिका का पूजन कर उनका आवाहन करना चाहिए. चित्रगुप्त पूजा में मां भगवती के शक्तिस्वरूप की पूजा अवश्य होती है इसलिए पास में ही मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर भी रखें और उनकी भी स्तुति अवश्य करें.
- तत्पश्चात ईशान कोण में वेदी बनाकर नवग्रह की स्थापना कर आवाहन करना चाहिए. नवग्रह की स्थापना के लिए नवग्रह मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं. नवग्रह स्थापना का विधान करने में असमर्थ हैं तो निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए नवग्रहों का स्मरण कर उन्हें प्रणाम करें. मंत्र बहुत सरल है. इसे आप रोज की पूजा में भी शामिल कर लें तो अच्छा है.
- नवग्रह मंत्रः
ऊँ ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च।
गुरू च शुक्र: शनि राहु केतव: सर्वेग्रहा: शान्ति करा: भवन्तु।
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अब चित्रगुप्त महाराज की पूजा जिसे दावात पूजा भी कहते हैं, आरंभ होती है.
सबसे पहले पूजन एवं हवन सामग्री पर जल छड़कते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करें-
नमस्तेस्तु चित्रगुप्ते, यमपुरी सुरपूजिते|
लेखनी-मसिपात्र, हस्ते, चित्रगुप्त नमोस्तुते ||
पूजा के लिए धूप, दीप, चन्दन, लाल फूल, हल्दी, रोली, अक्षत, दही, दूब, गंगाजल, घी, कपूर, कलम, दावात, कागज, पान, सुपारी, गुड़, पांच फल, पांच मिठाई, पांच मेवा, लाई, चूड़ा, धान का लावा, हवन सामग्री एवं हवन के लिए लकड़ी आदि की जरूरत होती है.
यदि घर में शस्त्र हैं तो उनकी भी पूजा कर लेनी चाहिए. इसके बाद भगवान श्रीचित्रगुप्त का आवाहन करें-
भगवान चित्रगुप्त का आह्वान मंत्रः
ॐ आगच्छ भगवन्देव स्थाने चात्र स्थिरौ भव |
यावत्पूजं करिष्यामि तावत्वं सान्निधौ भव|
ॐ भगवन्तं श्री चित्रगुप्त आवाहयामि स्थापयामि ||
(हे चित्रगुप्तजी मैं आपका आह्वान करता हूं. आप इस स्थान पर आखर विराजमान हों. मैं पूरे भक्तिभाव के साथ यथाशक्ति आपका पूजन करने को इच्छुक हूं. मैं भगवन आप मेरी पूजा को स्वीकार करने के लिए पधारें.)
इसके बाद आसन देने का विधान है.
निम्न मंत्र पढ़ते हुए भगवान चित्रगुप्त को आसन दें-
ॐ इदमासनं समर्पयामि| भगवते चित्रगुप्त देवाय नमः ||
पाद्य अर्थात पांव पखारने के लिए जल दें.
पाद्य मंत्रः
ॐ पादयोः पाद्यं समर्पयामि | भगवते चित्रगुप्त देवाय नमः||
इसके बाद आचमन कराया जाता है.
आचमन मंत्रः
ॐ मुखे आचमनीयं समर्पयामि | भगवते चित्रगुप्ताय नमः ||
स्नानः
आचमन के बाद स्नान कराने का विधान है. स्नान मंत्र बोलते हुए प्रतिमा के पास जल छिड़केंः
ॐ स्नानार्तः जलं समर्पयामि | भगवते श्री चित्रगुप्ताय नमः ||
वस्त्र अर्पणः
स्नान के उपरांत वस्त्र समर्पित करना चाहिए.
ॐ पवित्रो वस्त्रं समर्पयामि| भगवते श्री चित्रगुप्त देवाय नमः ||
पुष्प अर्पणः
निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए फूलों की माला चढ़ाएं-
ॐ पुष्पमालां च समर्पयामि| भगवते श्री चित्रगुप्तदेवाय नमः ||
निम्न मंत्र का जप करते हुए हुए सुगंधित धूप जलाएं-
ॐ धूपं समर्पयामि| भगवते श्री चित्रगुप्तदेवाय नमः ||
दीप दर्शनः
दीप जला लें और निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए दीप दिखाएं-
ॐ दीपं दर्शयामि| भगवते श्री चित्रगुप्त देवाय नमः
नैवेद्य समर्पणः
अब एक पात्र में नैवेद्य या मिठाइयां रख लें और निम्न मंत्र का जप करते हुए समर्पित कर दें.
ॐ नैवेद्यं समर्पयामि| भगवते श्री चित्रगुप्त देवाय नमः ||
तांबूल अर्पणः
ताम्बूल-दक्षिणा. हाथ में पान, कसैली,ईलायची और कुछ धन रख लें और उसे चढ़ा दें.
ॐ ताम्बूलं समर्पयामि| ॐ दक्षिणां समर्पयामि| भगवते श्री चित्रगुप्त देवाय नमः ||
इसके बाद परिवार के सभी सदस्य अपनी किताब, कलम, दवात आदि की पूजा करें और चित्रगुप्तजी के समक्ष रखें. परिवार के सभी सदस्य एक सफ़ेद कागज पर एप्पन (चावल का आटा,हल्दी,घी, पानी से मिलकर बना) व रोली से स्वस्तिक चिह्न बनाएं.
स्वस्तिक के नीचे पांच देवी देवता के नाम लिखें. उसके नीचे लालस्याही से भगवान श्री चित्रगुप्त का उपासना मंत्र लिखना चाहिए.
भगवान चित्रगुप्त उपासना मंत्रः
मसीभाजन संयुक्तश्चरसि त्वम्! महीतले।
लेखनी कटिनी हस्त चित्रगुप्त नमोस्तुते||
चित्रगुप्त ! मस्तुभ्यं लेखक अक्षरदायकं |
कायस्थजातिमासाद्य चित्रगुप्त ! नामोस्तुते ||
मंत्र लिखने के बाद उसी कागज पर नीचे एक तरफ अपना नाम पता व दिनांक लिखें. दूसरी तरफ अपनी आय-व्यय का विवरण दें. अगले वर्ष के लिए आवश्यक धन हेतु भगवान से प्रार्थना करें. फिर अपने हस्ताक्षर करके कागज को मोड़कर रख दें जिसे पूजा के बाद जल में प्रवाहित कर दें.
इस कागज और अपनी कलम को हल्दी रोली अक्षत और मिठाई अर्पित कर पूजन करें. इसके बाद श्रीचित्रगुप्त पूजन कथा सुननी चाहिए. कथा सुनने के बाद आरती-हवन करें और प्रसाद ग्रहण करें.
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