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उसे उस पक्षी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की उत्सुकता होने लगी. उत्सुकता जितनी बढ़ती उसका मन उतना ही आनंदित होता. ऐसा तो उसके साथ पहली बार हो रहा था.
सुनहरे पंखों वाले ऊपर की डाल पर बैठे पक्षी को परमात्मा समझिए और नीचे वाले पक्षी को जीवात्मा. जीवात्मा ही संसार के सारे सुख-दुख भोग रहे हैं जैसे उस पक्षी को कभी मीठे तो कभी कड़वे फल मिल जाते थे.
जीवात्मा ही बेचैन होते हैं. सुख मिले तो उधम मचाने लगेंगे और दुख का काल आया तो हिम्मत हारने लगेंगे परंतु परमात्मा तो समभाव में ही रहते हैं. इसलिए जीवात्मा का अंततः झुकाव परमात्मा की तरफ ही होता है.
जीवात्मा जब अपनी सुख-सुविधाओं के लिए भागता है उधम मचाता है तो उसे दुख ही दुख मिलते हैं. वह परेशान हो जाता है. ऐसे समय में कोई पवित्र आत्मा उसे सहारा देने आती है, उसे मार्ग दिखाती है.
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आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
आप नियमित पोस्ट के लिए कृपया प्रभु शरणम् से जुड़ें. ज्यादा सरलता से पोस्ट प्राप्त होंगे और हर अपडेट आपको मिलता रहेगा. हिंदुओं के लिए बहुत उपयोगी है. आप एक बार देखिए तो सही. अच्छा न लगे तो डिलिट कर दीजिएगा. हमें विश्वास है कि यह आपको इतना पसंद आएगा कि आपके जीवन का अंग बन जाएगा. प्रभु शरणम् ऐप्प का लिंक? https://goo.gl/tS7auA
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