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उन्होंने बताया कि यदि तुम्हारी रानी कोजागरी लक्ष्मी पूजा व्रत करें तो रूठी हुई देवियां लक्ष्मीजी की कृपा से पुनः वापस आ जाएंगी और तुम पहले से भी अधिक सुखी-संपन्न हो जाओगे.
रानी ने आश्विन माह में पूर्णिमा के दिन कोजागरी लक्ष्मी पूजा का व्रत रखा. वह पूरी रात ध्यान करती रहीं. एक पल के लिए भी नहीं सोईं. रानी ने पूरे दिल से पूजा की और उसकी पूजा में बहुत शक्ति थी.
रानी की धार्मिक भावना और निष्ठा देखकर गरीबी की देवी अलक्ष्मी की लोहे की प्रतिमा गल गई. इससे राजा की चिंता दूर हो गई. उन्हें शिल्पकार का अपमान भी नहीं करना पड़ा और प्रतिमा भी गल गई. अब राज्य का गौरव वापस लौटने लगा.
जब देश के लोगों ने यह कहानी सुनी तो उन्होने भी कोजागरी लक्ष्मी पूजा का व्रत करने का निश्चय किया. इस तरह कोजागरी लक्ष्मी पूजा का व्रत लोकप्रिय हुआ.
धीरे धीरे हर घर में यह प्रथा चल गई. लोग आज भी इस परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं. कोजागरी पूर्णिमा को शरद् पूर्णिमा भी कहते हैं. शरद् पूर्णिमा के चांद का बहुत महत्व है.
कहते हैं इस शरद पूर्णिमा को चांद धरती पर अमृत बरसाता है इसलिए रात्रि में दूध की बनी खीर को खुले छत आदि पर रखने का विधान है. अमृत से सींचे जाने के बाद उसे प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है.
प्रभु शरणम् ऐप्पस पर कार्तिक मास पर विशेष शृंखला आरंभ हो गई है. आप इससे जुड़े रहें ताकि इस महान माहात्म्य वाले व्रत की सभी माहात्म्य कथाओं से वंचित न हो सकें. आपको लगेगा कि यह बहुत उपयोगी ऐप्पस मिल गया जिससे आपकी ऐसी धार्मिक जिज्ञासाएं शांत हुईं जिसकी आपको लंबे समय से तलाश थी. अच्छा न लगे तो डिलीट कर दीजिएगा पर एक बार देख तो लीजिए.
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