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जम्हाई और फिर चुटकी की आवाज गूंज रही थी. यह सिलसिला रातभर चलता रहा. देवी सीता चिंतित हुईं कि कहीं प्रभु को किसी बीमारी ने तो नहीं घेर लिया. प्रभु कुछ बोलते न थे बस जम्हाई पर जम्हाई लेते थे. सीताजी ने लक्ष्मण को भेजा राजवैद्य को बुलाने के लिए.
लक्ष्मणजी आए औऱ द्वार खुला. प्रभु ने जम्हाई लेनी बंद कर दी. जम्हाई बंद हुई तो हनुमानजी की चुटकी भी रूक गई. सभी लोग आश्चर्य में थे कि यह आखिर क्या हो रहा है. भगवान श्रीराम ने पूरी बात बताई. हनुमानजी की भक्ति की खूब प्रशंसा हुई.
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