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महाराज वरेण्य की पत्नी महारानी पुष्पिका भी उन्हीं की तरह बड़ी गुणवती और सदाचारिणी होने के साथ ही गणेश भक्त थीं. सच तो यह था कि पिछले जन्म में भी ये दोनों भगवान् गणेश के भक्त थे.
उस जन्म में पति-पत्नी ने लगातार बारह साल तक गणपति आराधना करके उनको प्रसन्न कर लिया तो भगवान् गणेश ने उन्हें वरदान दिया था कि अगले जन्म में मैं तुम्हारा पुत्र बनूंगा.
इधर इंद्र समेत सभी देवगण दैत्य सिंदूरासुर से बुरी तरह डरे हुये थे. गुरु बृहस्पति के कहने से सभी देवता भगवान गणेश के पास जाकर बोले- प्रभु संसार को संकट में डालने वाले सिंदूरासुर को आखिर किसने बनाया. उसने जीना मुहाल कर रखा है.
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