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इन्द्र के अंश से बाली हुए तो सूर्य के अंश से बाली के भाई सुग्रीव पैदा हुए. स्वयं ब्रह्मा ने अपने अंश से रीक्षराज जाम्वन्त को पैदा किया और धरती पर भेजा.

श्रीराम का कार्य सफल करने के लिए स्वयं महादेव ने ग्यारहवें रुद्र के रूप में हनुमान का अवतार लिया. अन्य देवता भी वानर रूप में आए और सुग्रीव की सेना में शामिल हुए.

इसी सेना के बल पर श्रीराम ने रावण का संहार किया और नंदी का शाप पूर्ण हुआ. रावण जैसे ज्ञानी द्वारा किसी के मुख का उपहास करना उसके अंत का कारण बना. इस कथा में एक संदेश भी है. किसी भी जीव के रूप का उपहास नहीं करना स्वयं के लिए संकट को निमंत्रण देना है.
(लोमश ऋषि द्वारा वर्णित स्कंद पुराण एवं बाल्मीकि रामायण की कथा)

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

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