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यह सोचकर गणपति को समस्त देवी-देवताओं को आमंत्रित करने का काम सौंपा गया. गणेशजी ने इस काम को सहर्ष स्वीकार लिया.
लेकिन गजानन के साथ समस्या यह थी कि उनका वाहन चूहा है जो बहुत तेजी से चल नहीं सकता. जिम्मेदारी जितनी बड़ी, समस्या उससे कम न थी.
लंबोदर ने काफी विचारकर एक जुगाड़ निकाल ही लिया. उन्होंने सारे निमंत्रण पत्र उठाए और पूजन सामग्री के साथ ध्यान में बैठे शिवजी के सामने जा पहुंचे.
गणेशजी को विचार आया कि जब सारे देवताओं का वास भगवान शिव में हैं, तो यदि शिवजी को प्रसन्न कर लिया जाए तो सारे देवता स्वतः प्रसन्न हो जाएंगे.
श्रीगणेश ने शिवजी का पूजन करके सारे देवताओं का आह्वान किया. आह्वान करने के बाद उन्होंने सभी देवों का निमंत्रण पत्र शिवजी के चरणों में समर्पित कर दिया.
इस तरह सारे निमंत्रण पत्र देवताओं तक स्वत: पहुंच गए. सभी यज्ञ में नियत समय पर पहुंचे. श्रीगणेशजी ने बुद्धि के बल पर एक मुश्किल काम को सरलता से पूरा कर दिया.
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आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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