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राजा ने अपने इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए अगले दिन की राजसभा में दरबारियों और मंत्रियों से जानने का निश्चय किया. अगले दिन की राजसभा में राजा भोज सबसे पहले राजसिंहासन पर जाकर आसीन हो गए.
धीरे धीरे करके उनके मंत्री एक-एक करके आने लगे तो जो दरबारी सभा में प्रथम उपस्थित हुआ उसने राजा को यथोचित प्रणाम किया और राजा ने प्रत्युत्तर में कहा- आओ मेरे मूर्ख मंत्री! अपना स्थान ग्रहण करो.
राजा के मुख से ऐसा अप्रिय सम्बोधन सुनकर मंत्री विस्मय में पड़ गया और बिना कुछ प्रतिवाद किए अपने आसन पर बैठ गया. उसके बाद दूसरा, फिर तीसरा व अन्य मंत्री आते रहे.
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