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बुद्ध समझ गए कि वह प्रचलित कर्मकांडों से प्रभावित है. बुद्ध बोले- ठीक है, इसमें क्या परेशानी है. बस जैसा मैं कहता हूँ वैसा ही करना.

तुम उन पंडितों से दो घड़े लेकर आना. एक में पत्थर और दूसरे में घी भर देना. दोनों घड़ों को नदी पर लेकर जाना और उन्हें इतना डुबोना कि बस उनका उपरी भाग ही दिखे.

उसके बाद पंडितों ने जो मन्त्र तुम्हें सिखाए हैं उन्हें जोर-जोर से बोलना और अंत में एक हथौड़े से घड़ों को नीचे से चोट कर फोड़ देना. ये सब करने के बाद मुझे बताना कि क्या देखा?

युवक बहुत खुश था उसे लगा कि बुद्ध द्वारा बताई गयी इस प्रक्रिया से निश्चित ही उसके पिता के सब पाप काट जाएंगे और उनकी आत्मा को स्वर्ग की प्राप्ति होगी.

अगले दिन उस युवक ने ठीक वैसा ही किया जैसा कहा गया था. सब करने के बाद वह बुद्ध के समक्ष उपस्थित हुआ. बुद्ध ने पूछा- बताओ तुमने क्या देखा?

युवक बोला- मैंने आपके कहे अनुसार पत्थर और घी से भरे घड़ों को पानी में डाल कर चोट की जैसे ही मैंने पत्थर वाले घड़े पर प्रहार किया घड़ा टूट गया और पत्थर पानी में डूब गए.

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2 COMMENTS

    • शुभ वचनों के लिए आपका हृदय से आभार।
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