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देवता को लगा क्या इसमें फिर से लालसा पैदा हो गईं. उन्होंने कहा- अब क्या विचार किया है, बताएं. आपको एक अवसर विचार बदलने का मैं देता हूं.
संत ने कहा- मैं अपने वरदान में संशोधन चाहता हूं. मैंने आपसे मांगा कि यदि मैं बीमार व्यक्ति को छूं दूं तो उसे स्वास्थ्य लाभ हो जाए. सूखे वृक्ष को छूं दूं तो हरा भरा हो जाए.
मैं इस वरदान में एक संशोधन यह चाहता हूं रोगी और वृक्ष का कल्याण मेरे छूने से नहीं मेरी छाया पड़ने ही होने लगे और मुझे इसका पता भी न चले.
देवता को बड़ा आश्चर्य हुआ. उन्होंने पूछा- क्या आप ऐसा इसलिए मांग रहे हैं क्योंकि आप किसी मलिन या बीमार को स्पर्श करने से बचना चाहते हैं?
संत ने कहा- ऐसा बिल्कुल नहीं है. रोगी या मलिन व्यक्ति से दूर रहने के लिए नहीं मैं ऐसा मांग रहा. मैं नहीं चाहता कि संसार में यह बात फैले कि मेरे स्पर्श करने से लोगोंं को लाभ होता है.
एक बार यह बात फैली तो फिर संसार में मुझे लोग एक चमत्कारिक शक्तियों वाला सिद्ध प्रचारित कर देंगे. मैं लोगों का कल्याण तो चाहता हूं लेकिन उस कल्याण के साथ मेरी प्रसिद्धि हो यह नहीं चाहता.
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आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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