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रम्भ का शव चिता पर रखा गया तो महिषी उसके साथ सती होने के लिए तैयार हो गई. वह भी चिता पर बैठ गई. अग्निदेव ने रम्भ को पुत्र का वरदान दिया था इसलिए वह उसे कैसे जलाते.

उसी समय महिषी के गर्भ से असुर का जन्म हुआ जिसका नाम पड़ा महिषासुर. पुत्र की रक्षा के लिए प्राण देने वाले रम्भ को भी नया शरीर मिला और वह रक्तबीज के रूप में चिता से निकला.

इस प्रकार महिषासुर और रक्तबीज की उत्पत्ति हुई. महिषासुर बाद में असुरों का राजा बना और रक्तबीज सेनापति.

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2 COMMENTS

  1. Its really very nice,
    I don’t have any word.u all of u doing a great job,please continue,gods blessing with u always.

    • आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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