[sc:fb]
रम्भ का शव चिता पर रखा गया तो महिषी उसके साथ सती होने के लिए तैयार हो गई. वह भी चिता पर बैठ गई. अग्निदेव ने रम्भ को पुत्र का वरदान दिया था इसलिए वह उसे कैसे जलाते.
उसी समय महिषी के गर्भ से असुर का जन्म हुआ जिसका नाम पड़ा महिषासुर. पुत्र की रक्षा के लिए प्राण देने वाले रम्भ को भी नया शरीर मिला और वह रक्तबीज के रूप में चिता से निकला.
इस प्रकार महिषासुर और रक्तबीज की उत्पत्ति हुई. महिषासुर बाद में असुरों का राजा बना और रक्तबीज सेनापति.
प्रभु शरणम् की सारी कहानियां Android व iOS मोबाइल एप्प पे पब्लिश होती है। इनस्टॉल करने के लिए लिंक को क्लिक करें:
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. फेसबुक पेज लाइक करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा. https://www.facebook.com/PrabhuSharanam कथा पसंद आने पर हमारे फेसबुक पोस्ट से यह कथा जरुर शेयर करें.
धार्मिक चर्चा में भाग लेने के लिए हमारा फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें. https://www.facebook.com/groups/prabhusharnam
Its really very nice,
I don’t have any word.u all of u doing a great job,please continue,gods blessing with u always.
आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
आप नियमित पोस्ट के लिए कृपया प्रभु शरणम् से जुड़ें. ज्यादा सरलता से पोस्ट प्राप्त होंगे और हर अपडेट आपको मिलता रहेगा. हिंदुओं के लिए बहुत उपयोगी है. आप एक बार देखिए तो सही. अच्छा न लगे तो डिलिट कर दीजिएगा. हमें विश्वास है कि यह आपको इतना पसंद आएगा कि आपके जीवन का अंग बन जाएगा. प्रभु शरणम् ऐप्प का लिंक? https://goo.gl/tS7auA