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प्रभु ने कहा- अगले जन्म में तुम महालक्ष्मी के अंश से उत्पन्न होकर दक्षिणा नाम से प्रसिद्ध होगी. तब मेरे अंश से उत्पन्न यज्ञ तुम्हारा वरन करेंगे. सुशीला ने शरीर त्याग दिया और ज्योति रूप होकर भगवान श्रीकृष्ण के श्री चरणों में लीन हो गईं.

सृष्टि के आरम्भ में यज्ञ करने पर देवताओ को हविष्य का भाग प्राप्त नहीं होता था. उनकी विनती पर भगवती जगदम्बा ने ने अपने दक्षिणी भाग से देवी दक्षिणा को प्रकट किया.

दक्षिणा का श्रीहरि के अंश यज्ञ के साथ विवाह हुआ. विवाह के बाद दक्षिणा ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम फल रखा गया. यही फल मनुष्यों को यज्ञ-हवनादि का फल प्रदान करता है.

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

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