May 2, 2026

महामृत्युंजय मंत्र

।।महामृत्युंजय मंत्र।।

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात॥

 

अर्थ:
हम तीन नेत्र वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी का पोषण करते हैं। जिस प्रकार एक ककड़ी (उर्वारुक) अपनी लता के बंधन से मुक्त हो जाती है, वैसे ही हम भी मृत्यु के बंधनों से मुक्त हो जाएं, ताकि मोक्ष की प्राप्ति हो सके।

भावार्थः

हमारे पूजनीय भगवान शिव के तीन नेत्र हैं, जो प्रत्येक श्वास में जीवन शक्ति का संचार करते हैं, जिनकी शक्ति से सम्पूर्ण विश्व का पालन-पोषण हो रहा है. हम उनसे प्रार्थना करते हैं कि वह हमें मृत्यु के बंधनों से मुक्त करें ताकि प्राणी को मोक्ष की प्राप्ति हो.

जिस प्रकार एक ककड़ी अपनी बेल में पक जाने के उपरांत उस बेल-रूपी संसार के बंधन से मुक्त हो जाती है. उसी प्रकार हम भी इस संसार-रूपी बेल में पक जाने के उपरांत जन्म-मृत्यु के बन्धनों से सदा के लिए मुक्त हो जाएं तथा आपके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुए शरीर को त्यागकर आप ही में लीन हो जाएं.

महामृत्युंजय मंत्र जप के लाभः

महामृत्युंजय मंत्र को काल को टालने वाला मंत्र कहा गया है. जब यमदूत मृकण्ड ऋषि के पुत्र मार्कण्डेय के पास आए तो वह इस मंत्र का पाठ कर रहे थे. काल को हिम्मत नहीं हुई कि वह महाकाल के उपासक को छू सके और उनकी मृत्यु टल गई.

ऋषि-मुनियों ने महामृत्युंजय मंत्र को वेद का हृदय कहा है. चिंतन और ध्यान के लिए प्रयोग किए जाने वाले अनेक मंत्रों में गायत्री मंत्र के साथ इस मंत्र का सर्वोच्च स्थान है.

See also  शिव सहस्रनामावलि
  • अकाल मृत्यु से रक्षा: यह मंत्र अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है और सुरक्षा प्रदान करता है।
  • आरोग्य और शक्ति: यह स्वास्थ्य में सुधार करता है, बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है और मानसिक शांति लाता है।
  • संकट नाश: यह जीवन के सभी दुखों, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
महामृत्युंजय मंत्र जप की विधिः
  • समय: सबसे अच्छा समय ब्रह्म मुहूर्त (सुबह) माना जाता है, लेकिन शाम को भी कर सकते हैं।
  • स्थान: शिवलिंग पर जल या बेलपत्र चढ़ाते समय इसका जाप करना सबसे उत्तम है।
  • संख्या: 11, 21 या 108 बार जाप करें।
  • तैयारी: शांत मन से, रुद्राक्ष की माला के साथ जाप करना चाहिए।
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