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अब श्रीराम ने दिन-रात के लिए अलग-अलग तो कहा नहीं था इसलिए हनुमानजी जोर-जोर से चुटकी बजाने लगे. हनुमानजी ने लगातार चुटकियां बजानी शुरू कर दीं. उसी समय श्रीरामजी को भी हनुमान की भक्ति का विचार आया.
हनुमानजी का परिश्रम बेकार न जाए इसलिए प्रभु श्रीराम बार-बार जम्हाई लेने लगे. हनुमानजी के कानों तक जम्हाई की आवाज पहुंची तो वह संतुष्ट हुए कि उनकी सेवा में कोई कमी नहीं है.
इधर भक्तवत्सल प्रभु सोच रहे थे कि जब भक्त ने अपने आराम की चिंता त्याग दी है तो उन्हें भी भक्त के भाव का मान रखना होगा. भगवान और भक्त अपने-अपने फर्ज निभाने में लगे. श्रीराम जम्हाई पर जम्हाई लेते रहे और हनुमानजी लगातार चुटकियां बजाते रहे.
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