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अगले दिन वह फिर आया और बोला- मैंने आपसे कल एक प्रश्न पूछा था, किंतु आपने मौन धारण किया था इसलिए उत्तर नहीं दिया. क्या आज आप उत्तर देंगे?
कबीरदास ने आज भी कुछ नहीं बोला बस फिर से खूंटे के ऊपर हथौड़ी मार दी. युवक ने सोचा कि संत पुरुष हैं, शायद मौन दो दिनों का चलता हैं.
वह तीसरे दिन फिर आया और अपना प्रश्न दोहराया. कबीरदास ने फिर से खूंटे पर हथौड़ी चला दी लेकिन बोले कुछ नहीं. युवक का धैर्य जवाब दे गया.
परेशान होकर उसने कहा- मैं तीन दिन से आपसे प्रश्न पूछ रहा हूं. आखिर आपका मौन टूटेगा कब? मुझे बताएं, मैं उसी दिन आउंगा पर मेरे प्रश्न का जवाब देना पड़ेगा.
कबीरदास जी बोल पड़े- तुम तो ज्ञानवान हो इसलिए मैंने सोचा संकेत भी समझते होगे. मैं तो तुम्हें रोज जवाब दे रहा हूं, पर शायद तुम समझ नहीं पा रहे हो.
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