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गणेशजी का वाहन चूहा तो तीव्र था नहीं. इसलिए उन्होंने माता-पिता की परिक्रमा की और हाथ जोड़कर उनके सम्मुख खड़े हो गए. कुछ पलों में कार्तिकेय भी पहुंचे और मोदक मांगने लगे.
शिवजी ने कहा- समस्त तीर्थों का स्नान, संपूर्ण देवों को नमस्कार, सब यज्ञों का अनुष्ठान, सभी प्रकार के व्रत, मंत्र, योग और संयम का पालन मिलकर भी माता-पिता के पूजन के सोलहवें अंश के बराबर भी नहीं होते. निर्णय तुम्हारी माता करेंगे.
माता पार्वती ने कहा- गजानन सैकड़ों पुत्रों और सैकड़ों गणों से बुद्धि और धर्माचरण में श्रेष्ठ है. इस कारण यह देवनिर्मित मोदक मैं इसे देती हूं. माता-पिता की भक्ति के कारण यह यज्ञादि में अग्रपूज्य होगा.
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अतीव श्रेष्ठतम …सनातन धर्म ध्वज वाहक ..बारम्बार अभिनन्दन जय सिया राम जी की ,,जय बजरंगबली जी महाराज जी की
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आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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This story is one of my favourite from childhood. Mata-Pita ke prati bhakti bhav se he Sri Ganesh pujya aur sab ke priya ban gaye. Jai Sri Ganesh. Jai Jagadamba. Jai Bholenath