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बाटी पाकर महात्मा बड़े खुश हुए और जाते हुए बोले- तुम्हारा भविष्य तुम्हारे कर्म और व्यवहार से फलेगा. बालक ने कहा- उसी कार्य के आधार पर हम अपना भोग, भोग रहे हैं.
धरती पर एक समय में अनेकों फूल खिलते हैं किन्तु सबके फल रूप, गुण, आकार-प्रकार, स्वाद में भिन्न होते हैं. इतना कहकर वह बालक मर गया. राजा अपने महल में पहुंचा और माना कि ज्योतिष शास्त्र, कर्तव्य शास्त्र और व्यवहार शास्त्र है.
यह अटल सत्य है कि एक ही मुहूर्त में अनेकों प्राणियों का जन्म होता है किंतु उनकी किस्मत अलग-अलग होती है. इसे ही तो प्रारब्ध कहते हैं. हम वही पाते हैं जो हमने किया होता है. हमारे कर्म हमारे साथ चलते हैं.
जो बीज हमने बोया है उसकी फसल काटनी ही होगी. ज्योतिष आपके कर्मों की परिणति का संकेत देता है, उससे थोड़ी राहत की राह बता सकता है आपके कर्मों का फल नहीं बदल सकता.
संकलनः संजना गोस्वामी
संपादनः राजन प्रकाश
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