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यह सुनकर सेठ की आंखों से आंसू बह निकले. पत्नी और बेटी को गले लगाकर सोचने लगा कि यदि आज मैने उस ज्ञानसूत्र को नहीं अपनाया होता तो जल्दबाजी में कितना अनर्थ हो जाता. मेरे ही हाथों मेरा निर्दोष परिवार खत्म हो जाता.
ज्ञान का यह सूत्र उस दिन तो मुझे महंगा लग रहा था लेकिन ऐसे सूत्र के लिए तो 500 अशर्फियां बहुत कम हैं. ज्ञान अनमोल है. इस कथा का सार यह है कि जीवन के दो मिनट दुःखों से बचाकर सुख की बरसात कर सकते हैं. वे क्रोध के दो मिनट हैं.
भागवत में भी यही संदेश दिया गया है. कहा गया है कि यदि तुम्हारे काम से किसी का अपकार होता है तो उस काम को एक दिन के लिए टाल दो. यदि उपकार होता हो तो तुरंत करो ताकि कहीं उपकार का विचार न बदल जाए.
बहुत ही प्रेरणादायक स्रोत प्रभु को प्राप्त करने का मैं अभिभूत हूँ आपके इस प्रयास से इस कलियुग में भी आप लोग दूसरों के हित और कल्याण के लिए तत्पर है सराहनीय है मैं आपकी पूरी टीम को प्रणाम करता हूँ और आपके उज्जवल भविष्य के लिए प्रभु से प्रार्थना करता हूँ। बहुत बहुत धन्यवाद्।
आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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