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वर्णाश्रम धर्म की मर्यादा-भंग के लिए रोमहर्षण को दण्ड देना ही होगा, इसके अहंकार को नष्ट करना होगा.

ऐसा विचार करते हुए क्रोध में अपना आपा खो बैठे. उन्होंने मुख्य यजमान शौनक ऋषि से भी इस संदर्भ में नहीं पूछा कि आखिर इतना सम्मान का किसने अधिकार दिया? किसने व्यास गद्दी पर बैठाया?

उन्होंने व्यास गद्दी पर बैठे रोमहर्षण का वध कर दिया. इससे यज्ञ-मण्डप में खलबली मच गयी.

यज्ञ क्षेत्र में नरबलि हो गयी थी. व्यासपीठ पर संकल्पित बैठे एक ऋषि की हत्या हुई थी. ऋषिगण बहुत ही क्षुब्ध तथा दुखी हुए.

महर्षि शौनक को जब यह पता चला तो वह बलराम के पास आए और कहा कि आपने अनर्थ कर दिया है. व्यासपीठ पर सूतकुल में उत्पन्न व्यक्ति कैसे बैठे हैं आपको पहले मुझसे पूछना चाहिए था.

बिना जाने अकारण आपने एक निर्दोष का वध कर दिया. रोमहर्षण भगवान वेद व्यास के पुराण-शास्त्र पारंगत विद्वान शिष्य थे.

भगवान वेद व्यास के परामर्श से हम सबने पुराण-गाथा श्रवण करने के लिए उन्हें व्यास आसन दिया था.

भले ही वह जाति से ब्राह्मण नहीं थे, पर ब्राह्मणोचित विद्वत्ता के कारण वह इस व्यास आसन पर बैठने के पात्र थे.

व्यास आसन पर बैठा व्यक्ति व्यास की पदवी प्राप्त होता है. सब उस पद उस मर्यादा का सम्मान करते हैं.

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