March 15, 2026

विद्वेष का विष यदि समय रहते न रोका गया तो संपूर्ण जाति को ग्रस सकता है जैसे एक सर्प के अपराध के लिए रुरु संपूर्ण सर्प जाति को दंडित करने लगा

lord shiv
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ऋषि स्थूलकेश कन्या अपने आश्रम ले आए. अप्सरा और गंधर्व का अंश होने के कारण वह कन्या अप्रतिम सुन्दरी थी. ऋषि ने उसका नाम रखा प्रमद्वरा.

भृगुवंशी ऋषि कुमार रुरु एक दिन स्थूलकेश के आश्रम पर घूमते-धूमते आया और प्रमद्वरा के रूप पर मोहित हो गया. रुरु के पिता प्रमति स्थूलकेश से मिले और रुरु और प्रमद्वरा का विवाह तय किया गया.

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