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फूलों की सुंदरता पर मोहित पुष्पदंत ने इस बात का ध्यान भी नहीं रखा कि इसी बाग के पुष्पों से प्रतिदिन राजा चित्ररथ शिवजी की पूजा करता है. पुष्पदंत ने बाग के फूल चुरा लिए.
अगले दिन सुबह राजा चित्ररथ नियमित क्रम में पूजा हेतु पुष्प लेने आए लेकिन उन्हें पुष्प प्राप्त नहीं हुए. पर यह तो आरम्भ मात्र था. बाग के सौंदर्य से मुग्ध पुष्पदंत प्रतिदिन पुष्प की चोरी करने लगा.
इस रहस्य को सुलझाने के राजा के प्रत्येक प्रयास विफल रहे. पुष्पदंत गंधर्व था इसलिए उसके पास लुप्त होने की शक्ति थी. इसलिए राजा उसे पकड़ नहीं पाए. परेशान राजा के पास कोई रास्ता नहीं बचा था.
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