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राम महोदर के साथ भगवान शिव के दर्शन को चले. महोदर ने उन्हें क्षण भर में शिवजी के समक्ष ला खड़ा किया. राम ने शिवजी के चरणों में साष्टांग दंड़वत करते हुए आशीर्वाद मांगा.
भगवान शिव ने उन्हें उठाया और बोले- राम ये सारे देव दैत्यों के सताए हुए हैं. दानवों ने इन्हें देवलोक से निकाल बाहर किया है. आप सभी दैत्यों का अंतकर इनकी समस्या का समाधान करें. मैं मानता हूं कि आप यह करने में समर्थ हैं.
राम ने कहा- हे महादेव आप सर्वज्ञ हैं, आपसे क्या छिपा. पर जिन दानवों से इंद्र समेत सारे देवता नहीं जीत सके उनका अंत मैं कैसे करूंगा. न तो मैं अस्त्र का विशेषज्ञ हूं न युद्ध कौशल का जानकार. मैं शस्त्रविहीन और अकेला भी हूं.
भगवान शिव ने कहा- मेरे प्रसाद से आप सभी शत्रुओं का हनन करने में समर्थ होंगे. इतना कहकर भगवान शिव ने तत्काल उन्हें कालाग्नि के समान शैव तेज प्रदान कर दिया.
भगवान ने कहा- आप युद्ध करें. मेरे प्रभाव से आपमें कौशल स्वतः विकसित हो जाएगा. आप बिना सीखे ही हर तरह के अस्त्र-शस्त्र चलाने में और युद्ध कौशल में निपुण हो जाएंगे. जाओ दैत्यों का हनन करो.
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